घड़ी का आविष्कार किसने किया ? Who discovered the time in Hindi ?

Last Updated on December 21, 2019 by Admin

पहले जिसने घड़ी को बनाया उसको टाइम कैसे पता था ? और सेकंड (Second), मिनट (Minute), घंटो (Hour) को कैसे बनाया ? टाइम तो शुरू से मौजूद था. इसे डिस्कवर करने के लिए और इस टाइम को बताने वाली सही साधन को बनाने के लिए कई सालों तक अलग अलग तरह के तरीक़े इस्तेमाल किये गए.

Ancient Egyptian Clocks :

आज जो हम 60 बेस्ड सिस्टम इस्तेमाल करते है ये 2000BC में सुमेरियंस ने इस्तेमाल करना शुरू किया था. फिर बबीलोनियंस (Babylonians) ने इस्तेमाल किया था. और आज भी हम वही सिस्टम को इस्तेमाल करके 1 घंटे में 60 मिनट्स और 1 मिनट में 60 सेकण्ड्स को बाँट दिया है.

शुरू ज़माने में लोग सूरज और चांद को देख कर दिन और रात को समझा उस वक़्त लकड़ी और हड्डी के टुकड़ों से टाइम देखा जाता था. ऐसा माना जाता है स्टोन सर्कल्स ( Stone circle) जैसे मेथड्स को टाइम को मापने के लिए इस्तेमाल किया. टाइम को मापने के तरीकों में सबसे पुराना तरीका ओबिलिस्क ( Obelisk ) है. जिसे Egyptians ने 3500 BC में बनाया था. जिसे शैडो क्लॉक्स (shadow clocks) के नाम से जाना जाता है. बाद में स्टार्स के पर्यवेक्षण से रात को भी 12 घंटे का बनाया. इसके बाद 1500 BC में टी- स्क्वायर (T- square) क्लॉक और सुन्दिअल्स (sundials) को बनाया गया था. उस वक़्त Egyptians ने दिन को 10 घंटो में बाँट दिया था और सूर्य का उदय (Sunrise ) का 1 घंटा और सूर्यास्त (Sunset) का 1 घंटा करदिया जिस से पूरे 12 घण्टे का दिन बन गया.क्यों की ये क्लॉक्स सूरज पर निर्भर थे इसलिये सिर्फ दिन में ही काम आते.

Water Clocks :

ग्रीक्स रात के वक़्त एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्सेर्वशन्स (Astronomical Observations) को रिकॉर्ड करने के लिए अलग अलग तरह के वाटर क्लॉक्स (Water clocks) का अविष्कार किया.अब पहली बार किसने इस वाटर क्लॉक्स का आविष्कार किया पता नहीं लेकिन बेबीलोन, Egypt, इंडिया और चीन में खरीब 16BC वि सदी में इस्तेमाल किया गया था. प्राचीन Egypt में रात में टाइम देखने के लिए मेरखेत(Merkhet) मेथड को भी इस्तेमाल किया गया था.

Candle clocks:

अब इसके बाद कैंडल क्लॉक्स (Candle clocks ) को चीन और जापान में इस्तेमाल करना शुरू किया लेकिन इसका Advanced Version अल जज़री (Al Jazari ) ने किया था. इसके बाद इन्सेन्स क्लॉक्स (Incense clocks) को चीन में इस्तेमाल किया गया था. इतिहासकार (Historians) का मानना है के इन क्लोक्स को इंडिया में आविष्कार किया गया था. क्यों की इनके ऊपर देवनागरी के नक्काशियां (Carvings) पाए गए थे. ये क्लॉक्स के लिए अगरबत्तियों को इस्तेमाल करते ये. जैसे ही जलकर ये बॉल तक पहुँचते तो ये बॉल्स निचे गिरते अब इसमें हर 1 घंटे के लिए अलग अलग खुशबू का इस्तेमाल किया जाता था.

Hourglass:

11th सेंचुरी में समुन्दर में सफर करते वक़्त ऑवर ग्लास (hourglass) का इस्तेमाल किया जाता था. ये एक आसान डिवाइस था जैसे ही रेत खत्म होती तो डिवाइस को पलट कर रक् देते थे. खरीब 15th सेंचुरी में बहुत सारे लोग ऑवर ग्लास को इस्तेमाल करना शुरू किया था.

Mechanical clocks:

इसके बाद वाटर क्लॉक ( water clock ) को एस्कापेमेंट मैकेनिज्म (escapement mechanism) के साथ बनाया गया था. इस में एक प्रोब्लम ये था के टेम्परेचर की वजह से टाइम में अंतर आता थो बाद में मरक्युरी को इस्तेमाल किया गया था. इसे क्लॉक टावर की तरह इस्तेमाल किया था ताकि सब लोग इसे देख सके, क्यों की उस ज़माने में वाच किसी के पास होती नहीं थी, और ये क्लॉक हर एक 1 घंटे के बाद बजता ताकि लोगों को प्रेयर्स (Prayers) के लिए और अपने दूसरे कामों को पूरे करने के लिए होता था. 11th सेंचुरी में पहली बार गेअरेड़ क्लॉक (geared clock) को अरब इंजीनियर अल मुरादी ( Al-Muradi) ने बनाया था. खरीब 14th सेंचुरी में catholic monks मैकेनिकल क्लॉक्स (mechanical clocks) को बनाना शुरू किया जो उस वक़्त प्रेयर्स के लिए वक़्त पता करने के लिए था. अब यहाँ तक जितने भी क्लॉक्स बनाए गए थे वो एक्यूरेट (Accurate) टाइम नहीं बताया करते और इन्हें बार बार रिसेट (reset) करना पड़ता था.

Pendulum clock:

1580 में इटालियन पोलीमाथ (polymath) गैलिलियो गलीली (galileo galilei) पेंडुलम के स्विंग को जब ध्यान से देखा तो ये सोंचा के इससे एक एक्यूरेट क्लॉक को बनाया जासकता है. इस कांसेप्ट को लेकर डच के साइंटिस्ट क्रिस्टिआन हुय्गेंस (Christiaan Huygens) ने 1656 में पेंडुलम क्लॉक को बनाया. शुरू में ये क्लॉक्स के एक्यूरेसी में खरीब एक मिनट का फर्क आता लेकिन बाद में इसके एक्यूरेसी में 10 सेक् का ही फ़र्क़ रह गया था.

Portable watch:

इसके बाद 17th सेंचुरी में पहली बार पोर्टेबल वॉचेस का अविष्कार हुआ जिन्हें पॉकेट वॉचेस के नाम से जाना जाता था. इस पोर्टेबल वाच के लिए मैनस्प्रिंग (mainspring) को इस्तेमाल किया गया था. लेकिन एक्यूरेसी में कई घंटों का अंतर आता. सबसे बड़ा चेंज तब हुआ जब मैनस्प्रिंग बैलेंस स्प्रिंग (balance spring ) के साथ बदल के करदिया थो एक्यूरेसी में बस 10 मिनट्स का डिफरेंस आता और 1680 में पहली बार मिनट हैंड को भी जोड़ दिया गया था.

Electric clocks :

1814 में पहली बार इलेक्ट्रिक क्लॉक्स का अविष्कार हुआ था जिसके लिए dry pile का इस्तेमाल किया जाता था. उस वक़्त ये एक्यूरेट नहीं था बाद में जब 1890’s में इलेक्ट्रिक (electric) सप्लाई आने के बाद इलेक्ट्रिक वॉचेस को ज्यादा पैदावार (manufacture) करने लगे अब इनकी एक्यूरेसी में 3 से 10 सेक् फ़र्क़ था. 1920’s में क्वार्ट्ज़ क्रिस्टल (quartz crystal) का इस्तेमाल करके क्वार्ट्ज़ क्लॉक (quartz clock) को बनाया गया. इस क्रिस्टल के कंपन को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल दिया जाता था. जिसकी frequency को भी एक्यूरेट रखा जाता. अब ये वॉचेस के एक्यूरेसी में दिन में हाफ सेकंड का फ़र्क़ रहता था.

Atomic clock:

अंत में एटॉमिक क्लॉक को बनाया गया जिसमे सीज़ियम एटम (Cesium atom) को इस्तेमाल किया गया था जिसकी एक सेकंड की frequency 9,192,631,770 है. अगर इनकी एक्यूरेसी के बारे में बात करें तो कई हजारों साल बाद इनमे बस कुछ सेकण्ड्स का फ़र्क़ आता है.

तो अंत में conclusion ये है के एक्यूरेट वॉचेस को बनाने के लिए कई साल लग गए तब जाकर आज हम एक्यूरेट टाइम का इस्तेमाल करके अपने कामों को पूरा करते है.

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