ब्लैक होल की खोज किसने किया – Who discovered Black hole in Hindi?

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Last Updated on September 25, 2020 by Admin

स्पेस या अंतरिक्ष एक ऐसी जगह है जो अभी भी वैज्ञानिकों के समझ में पूरी तरह से नहीं आया है. स्पेस कितनी दूर में पहला हुआ है ये कोई नहीं जानते लेकिन इसी स्पेस में बहुत सारे स्टार्स, प्लैनेट्स और ब्लैक होल्स है.

ब्लैक होल क्या है ?

ब्लैक होल एक ऐसी जगह है जहाँ ग्रेविटी इतनी ज़्यादा होती है के लाइट भी ग्रेविटी से एस्केप नहीं होती. क्यूंकि लाइट भी ब्लैक होल्स से एस्केप हो नहीं पाती इसलिए इन्हे देखना मुमकिन नहीं है.

ब्लैक होल बनने के लिए मैटर एक छोटी सी जगह में सिमट जाता है जिसकी वजह से बहुत ज़्यादा ग्रेविटी बनती है.

ब्लैक होल की खोज :

1783 में सबसे पहले ब्लैक होल की कल्पना जॉन मिचेल ( John Michell) नाम के फिलोसोफर ने की थी. मिचेल ने देखा के स्टार से जब लाइट निकलती है तो ग्रेविटी को एस्केप करके दूर निकल जाती है.

मिसाल के तौर पर हमारे सूरज की भी ग्रेविटी होती है, जब सूरज से निकलने वाली रौशनी सूरज की ग्रेविटी को एस्केप करके खरीब 8 मिनट बाद पृध्वी को पहुँचती है.8 मिनट इसलिए लगते है क्यों की पृथ्वी से सूरज की दूरी खरीब 150,000,000 किलोमीटर्स है.

इस कांसेप्ट को एक उदहारण से हम समझसकते है. ज़मीन से हम कोई भी चीज़ को आसमान की तरफ़ फ़ेंक ते है तो वो चीज़ कुछ हदतक ऊपर जाकर वापस पृध्वी और आजाती है. ये इसलिए होता है क्यों की पृध्वी की ग्रेविटी उस चीज़ को अपनी तरफ खींचती है.

इसी तारीख़े से सुण से निकलने वाली रौशनी के सात होता है, मिचेल का ये मानना था कि अगर एक स्टार की ग्रेविटी सूरज से 500 गुणा बढ़जाये तो लाइट कभी इस ग्रेविटी से एस्केप नहीं करपयेगी. इसका रिजल्ट ये होगा के स्टार से निकलने वाली रौशनी खुद स्टार के अन्दर ही रुक जाएगी.

लाइट एक सेक् में 300,000 कम ट्रेवल करती है, लाइट की इतनी स्पीड होने के बावजूद स्टार के ग्रेविटी से बच नहीं पाती. जब स्टार से कोई लाइट ही बहार न निकले तो ये कहना मुमकिन ही नहीं है के वहां एक स्टार है. क्यूँ की पूरा स्टार अँधेरे में बदल जाता है.

उस वक़्त मिचेल की इस थ्योरी को किसी ने नहीं माना था क्यों की वो अपने वक़्त के टेक्नोलॉजी से बहुत आगे का सोच रहे थे. मिचल ने इसे “डार्क स्टार” के नाम से बुलाया था.

अल्बर्ट आइंस्टीन :

1915 में अल्बर्ट आइंस्टीन के जनरल रिलेटिविटी के बाद ब्लैक होल्स के बारे में वैज्ञानिकों को अच्छेसे समझ में आने लगा. जनरल रिलेटिविटी के मुताबिक, मास का जितना ज़्यादा ग्रेविटी होगा उतना स्पेस और टाइम में बदलाव आता है.

आइंस्टीन के बाद कार्ल स्च्वार्जस्चिल्ड (Karl Schwarzschild) नाम के वैज्ञानिक ने भी पहले किये गए खोज को साबित किया और अभी दूसरे वैज्ञानिक ने भी इस रिसर्च में मदत की थी.

1967 में पहली बार जॉन व्हीलर (John Wheeler) ने ब्लैक होल नाम के शब्द को इस्तेमाल किया था. वही से पूरी दुनिया में ब्लैक होल नाम को इस्तेमाल करना शुरू किया था.

ब्लैक होल की तस्वीर :

2019 में पहलीबार ब्लैक होल के तस्वीर को इवेंट होराइजन टेलिस्कोप (Event Horizon Telescope ) ने लिया था. ये दुनिया का सबसे पहला ब्लैक होल का तस्वीर था.

ये ब्लैकहोल, 50 मिलियन लाइट इयर्स के दूरी पर रहने वाला गैलेक्सी एम् 87 का था. जब इसकी पिक्चर ली गयी थी तो ये बहुत एक्टिव था. इसकी पिक्चर इतनी क्लियर नहीं थी क्यों की ये ब्लैक होल 50 मिलियन लाइट इयर्स के दूरी पे था.

अगर हमें साफ़ तस्वीर चाहिए तो हमें हमारे पृध्वी जितना टेलिस्कोप बनना पड़ेगा.

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