रिक्टर स्केल का अविष्कार किसने किया – Who Invented Richter magnitude scale in Hindi ?

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Last Updated on September 16, 2020 by Admin

दुनिया भर में हर साल कही न कही भूकंप आते रहते है. किसी जगह इनका असर कम होता है तो किसी और जगह इनका असर बहुत ज़्यादा होता है. लोग भूकंप की वजह से अपने घर को खो देते है. इमारतें टूटने की वजह से जान और माल का नुक्सान होता है.

इंसान ने बहुत सारी टेक्नोलॉजी को  बनाया है लेकिन अभी तक भूकंप को उसके आनेसे  पहले डिटेक्ट करने वाले तकनीक को अभी तक नहीं बनाया गया है.

हैरी वो. वुड और जॉन ऐ एंडरसन (Harry O. Wood aur John A. Anderson) नाम के 2 अमेरिका के 2 वैज्ञानिक ने मिलकर सबसे पहले प्रैक्टिकल भूकम्प को मापने वाला यंत्र सिस्मोग्राफ को 1920 में बनाया था.

इन्ही 2 वैज्ञानिकों ने कुछ साल बाद चार्ल्स रिक्टर को रिक्रूट करलिया था. चार्ल्स रिक्टर भी भूकंप मापने वाले यंत्र को सुधार ने में और भी इसे बेहतर बनाने में लग गए थे.  

1931 में कीयू वदति ( Kiyoo Wadati) नाम के जापान के वैज्ञानिक ने, जापान में आए बड़े बड़े भूकंप पर रिसर्च करने लगे. कीयू वदति ने लागरिथ्म का इस्तेमाल करके भूकम्प का मैग्नीट्यूड को चेक कर रहे थे.

साल 1935 में रिक्टर ने वदति के रिसर्च  में आये  प्रॉब्लम्स को हल  किया और लागरिथ्म के ज़रिये से भूकंप के मैग्नीट्यूड को मापने का एक तरीका निकाला.

इसलिए हम भूकम्प को मापने वाले यंत्र को  रिक्टर स्केल कहते है. इस का एक और नाम है जिसे हम लोकल मैग्नीट्यूड स्केल भी कहते है.

आज टेक्नोलॉजी बढ़ने के बाद वैज्ञानिक और भी भूकंप के बारे में पढ़ना चाहते है. इसलिए भूकम्प के रीडिंग को डिजिटल रूप में  स्टोर करने का तरीखा निकला, जिसे आप कंप्यूटर में रीडिंग को स्टोर करके इनपर रिसर्च करसकते है.

रिक्टर स्केल कैसे काम करता है ?

रिक्टर स्केल को बनाने के लिए मैगनेट, स्ट्रिंग, पेंडुलम बॉब, सपोर्ट, पेन, रोटेटिंग ड्रम, पेपर की ज़रूरत होती है. 

जब भूकंप आता है तो मैगनेट के बीच वाली स्ट्रिंग हिलने लगती है, क्यूँ की मैगनेट के चारो और मैग्नेटिक फिल्ड होता है, भूकंप की वजह से स्ट्रिंग मैग्नेटिक फील्ड को कट करती है.

इसके नतीजे में छोटे छोटे इलेक्ट्रिक पल्सेस डेवेलोप होते है. इन पल्सेस को डिजिटल रूप में  स्टोर करके इनके रिसर्च के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

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