इंटरनेट का अविष्कार किसने किया ? Who Invented internet in Hindi ?

Last Updated on December 26, 2019 by Admin

2015 के रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पूरी दुनिया में 3.2 बिलियन आबादी इंटरनेट को इस्तेमाल करती है. हम सब को कभी ना कभी ये सवाल ज़रूर आया होगा के इंटरनेट को कौन नियंत्रण करता है ? और कैसे इंटरनेट हम तक पहुँचता है ? और किसने इंटरनेट का आविष्कार किया था ?

इंटरनेट का इतिहास (Internet History) :

इंटरनेट से पहले किये गए कुछ आविष्कार इंटरनेट के लिए मददगार रहे जिसमे टेलीग्राफ (Telegraph),ट्रान्साटलांटिक केबल (Transatlantic telegraph cable),टेलीफोन (Telephone) है. 1836 में टेलीग्राफ का आविष्कार हुआ था. जिसके अंदर मोर्स कोड तकनीक को इस्तेमाल किया गया था.जो डॉट्स और देशेस के ज़रिये कनेक्ट होता है. इसी तरह कम्प्यूटर्स में 0 और 1 का सिस्टम लाया गया है.

1854 में ट्रान्साटलांटिक केबल प्रोजेक्ट को शुरू किया गया था और कम्पलीट 1866 में हुआ था. इस प्रोजेक्ट के ज़रिये अटलांटिक समुन्दर में कम्युनिकेशन के लिए एक जगह से दूसरी जगह को केबल्स का इस्तेमाल करके जोड़ दिया गया था. आज इसी तरीके का इस्तेमाल करके पूरी दुनिया इंटरनेट से जुड़ा हुआ है.

1876 में टेलीफोन के अविष्कार के बाद इंटरनेट को कनेक्ट करने के लिए एक माध्यम सा बनगया. इंटरनेट के अविष्कार को किसी एक इंसान ने नहीं बनाया बल्कि बहुत सरे इंजीनियरस के योगदान से बनगया गया था.

शुरुआती कंप्यूटर (Early computers) :

शुरू ज़माने में कम्प्यूटर्स एक रूम जितने बड़े हुआ करते थे. उस वक़्त बैच प्रोसेसिंग का इस्तेमाल करके जॉब्स (काम) को पूरा किया था. बैच प्रोसेसिंग (Batch processing) में ग्रुप ऑफ़ जॉब्स को पंच कार्ड्स के ज़रिये कंप्यूटर को दिया जाता जिसे वो एक के बाद एक कम्पलीट करता था.

बैच प्रोसेसिंग के बाद टाइम शेयरिंग (Time sharing) कंप्यूटर का इस्तेमाल किया गया जिसमे एक CPU को कई users इस्तेमाल कर सकते थे. हर user को पर्टिकुलर टाइम दिया जाता जिसके चलते हर यूजर अपने अपने काम एक साथ कम्पलीट करते.

USA and Russia cold war :

इंटरनेट की शुरुवात एक तरह से 1950s में हुई रूस और अमेरिका की कोल्ड वॉर से हुआ. अक्टूबर 4 ,1957 को रूस ने सबसे पहला मैन मेड (man made) सॅटॅलाइट स्पुतनिक (Sputnik) को स्पेस में भेजा गया था. रूस के इस टेक्नोलॉजी को देख कर अमेरिका को भी लगा के उसे टेक्नोलॉजी में आगे भड़ना चाहिए.

ARPA and DARPA :

1958  में उस वक़्त के राष्ट्रपति ने एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (ARPA) को बनाया ताके टेक्नोलॉजी और साइंस में अमेरिका आगे बढ़सके. AARPA को बाद में डिफेंस अडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA) करदिया गया. इसी साल में जब  NASA को शुरू किया गया थो स्पेस के सारे प्रोजेक्ट्स DARPA से नासा को देदीये गए.

1962  में DARPA ने फेमस कंप्यूटर साइंटिस्ट J. C. R. लिखलदर (J. C. R. Licklider) को इनफार्मेशन प्रोसेसिंग टेक्निक्स ऑफिस (IPTO) के लिए चुना गया जो DARPA का ही एक हिस्सा था. शुरू से ही लिखलदर की ये सोंच थी के सारे कम्प्यूटर्स को एक ही नेटवर्क में जोड़ा जा सकता है. इसी सोंच के साथ 3 नेटवर्क टर्मिनल्स का इस्तेमाल करके Santa Monica , Berkeley और  MIT को जोड़ दिया. इन 3 टर्मिनल्स के लिए अलग अलग कमांड्स थे.

ARPANET :

अब इसमें परेशानी इस बात की हो रही थी के एक वक़्त में किसी एक टर्मिनल पर ही बाथ होसकती थी. मिसाल के तौर पर एक साथ santa monica और MIT के साथ बाथ नहीं किया जासकता था. दूसरे टर्मिनल पर बाथ करने के लिए पहले टर्मिनल से उठ कर दूसरे टर्मिनल पर जाना पड़ता था. उस वक़्त उन्होंने सोंचा के एक ऐसा टेरिनल होना चाहिए जो हर जगह कनेक्ट करसके. बस इसी विचार को लेकर  ARPANET को बनाया गया.

Packet Switching :

इसी बीच दूसरी तरफ 1960 में अमेरिका के रिसर्च एंड डेवलपमेंट (RAND Corporation) में Paul Baran अपना रिसर्च के बाद एक ऐसे टेक्नोलॉजी का अविष्कार किया जो परमाणु युद्ध के बाद भी नेटवर्क को नष्ट ना कर सके इसी टेक्नोलॉजी को 1965 में UK के नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) में Donald Davies ने आविष्कार किया था. इन दोनों के आविष्कार का नाम था पैकेट स्वीचिंग (Packet switching).

पैकेट स्वीचिंग 3 कॉन्सेप्ट्स को लेकर बनाया गया था. पहला ये एक decentralized network है . अगर कोई एक रास्ता नष्ट हो जाता है थो तुरंत ये दुसरे रस्ते से इनफार्मेशन पहुंचता है. दूसरा ये है के ये पूरे डाटा को छोटे पैकेट्स में सोर्स से डेस्टिनेशन तक पहुंचता है तीसरा ये है सोर्स का और डेस्टिनेशन का IP अड्रेस इन पैकेट्स पर होता है और हर नोड पर ये डाटा स्टोर होता है फिर फॉरवर्ड होता है. अगर कोई पैकेट मिस हो जाता है थो डेस्टिनेशन कंप्यूटर उस मिसिंग पैकेट को रिक्वेस्ट करके फाइल को कम्पलीट करता है. ये सब प्रोसेस लाइट के स्पीड में होता है. 1 सेकंड में लाइट खरीब 300,000 kilo meters ट्रैवल  करती है.

Interface Message Processor (IMP) :

1967 में हुआ एक कॉनफेरेन्स में अर्पनेट के डेवेलपर्स ने पैकेट स्वीचिंग के बारे में सुना थो इस तकनीक को ARPANET  में लागू करना चाहा. 1969 में BBN (Bolt Beranek and Newman) नामी company को Interface Message Processor (IMP) बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला जो एक मिनी कंप्यूटर था. और इसे मेनफ्रेम (Mainframe) से कनेक्ट किया जाता जो आज के राऊटर की तरह काम करता था.

Backbone of Internet :

 October 29,1969 रात के 10:30 बजे University of California, Los Angeles और Stanford Research Institute के बीच सबसे पहला इंटरनेट कनेक्शन IMP और सीरियल कम्युनिकेशन को इस्तेमाल करके स्थापित किया गया.  

दोनों जगह टेलीफोन से भी जूड़े हुए थे और सबसे पहले एक जगह से दूसरी जगह को मैसेज में L टाइप किया और O टाइप किया और टेलीफोन पर कन्फर्म किया जब G टाइप किया थो सिस्टम क्रैश (Crash) होगया इस तरह इंटरनट पर सबसे पहले भेजे जानेवाला मैसेज LO बनगया. कुछ घंटो बाद पूरा मैसेज लॉगिन भेजा गया.

इन दो universities का  कनेक्शन ही इंटरनेट का बैकबोन (Back bone) माना जाता है. इसके बाद और IMPs को BBN  ने बनाया और एक के बाद एक universities इसी नेटवर्क में ऐड होते चले गए और नेटवर्क बढ़ता चला गया और internetworking इंटरनेट बनगया.

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